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चंदन की कीमत उसकी गुणवत्ता पर निर्भर करती है। 

हम पूरे भारत में चंदन की खेती के लिए किसानों की मदद कर रहे हैं, जिन्हें चंदन के पौधे लगाने का उच्च अनुभव है।

 

चंदन के पेड़ केवल उन्हीं नर्सरियों द्वारा लगाए जाने चाहिए जो चंदन को 12 से 15 वर्षों में तैयार करने का तरीका जानते हों।

 

चंदन की कीमत उसकी गुणवत्ता पर निर्भर करती है। 

 

यदि भीतरी लकड़ी की गुणवत्ता अच्छी है, तो पौधे का मूल्य 3-5 लाख रुपये होगा।

 

यदि भीतरी लकड़ी की गुणवत्ता कम है, तो पौधे का मूल्य 50,000 से 1 लाख रुपये होगा।

 

हम चंदन की गुणवत्ता सुधारने या चंदन से होने वाली आय में वृद्धि करने में आपकी मदद करते हैं।

 

 

जैसे - सोने की कीमत उसकी गुणवत्ता पर निर्भर करेगी। 

14 कैरेट सोना सस्ता होता है।  24 कैरेट सोना महंगा होता है।

 

Sandalwood trees should be planted only by nurseries that know how to grow sandalwood in 12 to 15 years.

 

The price of sandalwood depends on its quality. 

 

If the quality of the heartwood is good, the plant will be valued at 3-5 lakh rupees.

 

If the quality of the heartwood is average, the plant will be valued at 50,000-1 lakh rupees.

 

We help you improve the quality of sandalwood or increase your income from sandalwood.

 

For example, 

The price of gold will depend on its quality. 

14-carat gold is cheaper.

24 carat gold is expensive.

 

हमारे पास चंदन के बागान में 8 साल का अनुभव है। हमारे पास चंदन के पौधों में रोग और कीटों का ज्ञान और अनुभव है और हम पौधों की सुरक्षा भी कर सकते हैं।

 

कैसे तैयार होता है चंदन का पेड़?

चंदन के पेड़ को शुरू के 8 सालों तक किसी बाहरी सुरक्षा की जरूरत नहीं होती क्योंकि उस समय तक इसमें खुशबू नहीं होती. ही पेड़ की लकड़ी के पकने की प्रक्रिया की शुरूआत होती है वैसे ही इसमें खुशबू आनी शुरू हो जाती है. इसी दौरान इसे सुरक्षा की जरूरत होती है. किसान भाई इसे अन्य जानवरों से बचाने के लिए खेत की घेराबंदी जरूर करवा दें. 

 

कितने प्रकार के चंदन?

चंदन के दो प्रकार होते हैं. एक सफेद चंदन और दूसरा लाल चंदन. उत्तर भारत में सफेद चंदन की खेती सबसे ज्यादा होती है. क्योंकि इसमें 7.5 पीएच वाली मिट्टी की जरूरत होती है. वहीं लाल चंदन के पेड़ के लिए 4.5 से 6.5 पीएच वाली मिट्टी की जरूरत होती है. यही कारण है कि लाल चंदन की खेती दक्षिण भारत में की जाती है. चंदन के पेड़ रेतीले और बर्फिले इलाके में नहीं उगाए जा सकते.

 

औषधीय एवं वाणिज्यिक फसलों में चन्दन एक ऐसा पेड़ है जिसकी लकड़ी भारतीय संस्कृति तथा सभ्यता से जुडी हुई है | अगर बात हिन्दू धर्म में पूजा – पथ की हो तो और भी महत्व बढ़ जाता है | ऐसा कोई घर नहीं है जिसके पास चन्दन की लकड़ी नहीं है | इसकी महत्ता यहीं तक सिमित नहीं है बल्कि इसकी लकड़ी से औषधीय तथा सुगन्धित इत्र बनाया जाता है इसलिए इसकी मांग देश ही नहीं बल्कि पुरे विश्व में मौजूद है | उत्पादन कम रहने के कारण चन्दन की लकड़ी की कीमत बहुत ज्यदा है | वर्तमान समय में भारत में 7,000 से 8,000 टन प्रति वर्ष लकड़ी खपत है लेकिन उपलब्धता मात्र 100 टन तक ही है |

Sandalwood Plant
Sandalwood Plant 1.5 years

ग्राम भिडूकी होडल जिला पलवल​

 

ग्राम भिडूकी होडल जिला पलवल मे 15 महीने के चंदन के पौधे

हमारी दृष्टि

हम किसानों को चंदन लगाने में मदद कर रहे हैं ताकि वे 12 से 15 साल में धनवान बन सकते हैं

यह वैकल्पिक तरीका भी है जिससे किसान अपनी कृषि से धनवान बन सकते हैं

मीडिया से जागरूकता
Sandalwood Plant

9 साल में चंदन की खेती से किसान ने कमाए 30 करोड़ रु

 

गुजरात के भरूच जिले के हांसोट तालुका के कांटासायण गांव में अल्केश भाई पटेल ने चंदन की खेती की शुरुआत की थी !
2010-11 में स्‍थानीय विधायक और मंत्री ईश्‍वर सिंह पटेल की मदद से वनविभाग से चंदन के पौधे लिए थे. किसान अल्‍केश ने दो एकड़ जमीन में सफेद चंदन की खेती की शुरुआत की थी. अब चंदन के ये पौधे पेड़ बन चुके हैं. इन पेड़ की कीमत अब 30 करोड़ रुपये हो चुकी है

Rori Punjab

Zee News - चंदन की मांग 300 प्रतिशत है जबकि इसका उत्पादन महज 30 प्रतिशत तक होता है।

 

चंदन अपनी खुशबू को लेकर हर किसी को आकर्षक करता है. चंदन की लकड़ी बहुत महंगी बिकती है. अगर मांग और उत्पादन के हिसाब से देखा जाए तो चंदन की मांग 300 प्रतिशत है जबकि इसका उत्पादन महज 30 प्रतिशत तक होता है. भारत में ऐसे बहुत से किसान हैं, जो चंदन की खेती से लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये कमा रहे हैं. 

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